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भीड़ कविता | भीड़ कविता कोश | Bheed Kavita in Hindi

सितंबर 06, 2020

भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता है

उसके बस नाखून होते हैं

उसके बस दांत होते हैं

नुकीले

बहुत नुकीले

भेड़िए जैसे

नहीं

शायद

भेड़िए से भी भयानक

जो सिर्फ खरोंच नहीं मारते

खूनमखून ही नहीं करते

आपको कच्चा चबा जाते हैं


सावधान

भेड़ियों की भीड़

शहर में घुस आई है

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