Best Sharab Shayari - शराब पर शायरी | अध्याय 2


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Rooh Kis Mast Ki Pyasi Gayee Maikhane Se
May Udi Jaati Hai Saqi Tere Paimane Se

रूह किस मस्त की प्यासी गयी मयखाने से
मय उड़ी जाती है साक़ी तेरे पैमाने से



उस शख्स पर शराब का पीना हराम है,
जो रहके मैक़दे में भी इन्सां न हो सका.

Us Shakhs Par Sharab Ka Peena Haraam Hai
Jo Rahake Maikade Me Insan N Ho Saka.


Too Ne Kasam May-Kashee Kee Khayi Hai ‘Ghalib’
Teri Kasam Ka Kuchh Aitbaar Nahi Hai..
-Mirza Ghalib

तू ने कसम मय-कशी की खाई है ‘ग़ालिब’
तेरी कसम का कुछ एतिबार नही है..

-मिर्ज़ा ग़ालिब


May-Khana-E-Hastee Mein May-Kash Vahee May-Kash Hai,
Sambhale To Bahak Jae, Bahake To Sambhal Jae !


मय-ख़ाना-ए-हस्ती में मय-कश वही मय-कश है,
सँभले तो बहक जाए, बहके तो सँभल जाए !


के आज तो शराब ने भी अपना रंग दिखा दिया,
दो दुश्मनो को गले से लगवा, दोस्त बनवा दिया.

Ke Aaj To Sharab Ne Bhi Apna Rang Dikha Diya
Do Dushmano Ko Gale Se Lagawa,
Dost Bana Diya.


पी के रात को हम उनको भुलाने लगे,
शराब में गम को मिलाने लगे,

दारू भी बेवफा निकली यारों,
नशे में तो वो और भी याद आने लगे..

Pee Ke Raat Ko Hum Unko Bhulane Lage,
Sharab Me Gam Ko Milane Lage.


Daru Bewafa Nikali Yaaro,

Nashe Me To Wo Aur Bhi Yaad Aane Lage..


Na Jaane Us Roj Nashe Mein Kya Kah Diya Hamane,
Ab Ham Mayakhaane Jaate Hain Aur Mahafilen Jaim Jaatee Hain.

न जाने उस रोज नशे में क्या कह दिया हमने,
अब हम मयखाने जाते हैं और महफ़िलें जैम जाती हैं।


Mujhe Yakeen Hai Ki Duniya Me Dard Barh Jayein,
Agar Ye Peene Pilane Ke Ehtemam Na Ho.

मुझे यकीन है की दुनिया में दर्द बढ़ जाएँ,

अगर ये पीने पिलाने के एहतमाम हो।


मत पूछ उसके मैखाने का पता ऐ साकी,
उसके शहर का तो पानी भी नशा देता है.

Mat Punchh Usake Maikhane Ka Pata E Saki,
Usake Shahar Ka Pani Bhi Nasha Deta Hai.


बैठे हैं दिल में ये अरमां जगाये
के वो आज नजरों से अपनी पिलाये,

मजा तो तब ही आये पीने का यारो,
शराब हम पियें और नशा उनको हो जाए..


Baithe Hai Dil Me Ye Arman Jagaye
Ke Wo Aaj Nazaro Se Apani Pilaye.


Maza To Tab Hi Aaye Peene Ka Yaaro,
Sharab Ham Peeye Aur Nasha Unako Ho Jaaye..


रह गई जाम में अंगड़ायाँ लेके शराब,
हम से माँगी न गई उन से पिलाई न गई


हर जाम पी गया मैं, ऐ दर्दे-जिंदगानी,
फिर भी बड़ा तरसा हूं,
कुछ और शराब दे दो.


Har Jaam Pee Gaya Main,
E Darde-Zindagani,
Fir Bhi Tarasa Hun Kuchh Aur Sharab De Do.


Chhalakate Hothon Se Chhu Ke,
Hoton Ko Unhone Pyala Bana Dala,
Paas Aaye Kuch Wo Aise,
Zindagi Ko Unhone Madhushala Bana Dala.


छलकते होठो से छू के,
होठो को उन्होंने प्याला बना डाला,
पास आयी कुछ वो ऐसे,
जिन्दगी को उन्होंने मधुशाला बना डाला।


Meri Tabahi Ka Ilzaam Ab Sharab Par Hai,
Karta Bhi Kya Aur Tum Par Jo Aa Rahi Thi Baat.

मेरी तबाही का इल्ज़ाम अब शराब पर है,
करता भी क्या और तुम पर जो आ रही थी बात।


Nasha-E-May Se Kabhi Pyaas Bujhi Hai Dil Kee,
Tashnagee Aur Badha Lae Kharaabaat Se Ham !


नशा-ए-मय से कभी प्यास बुझी है दिल की,
तश्नगी और बढ़ा लाए खराबात से हम !


Kabhee Dekhenge Ai Jaam Tujhe Hothon Se Laga Kar,
Too Mujh Mein Utarta Hai Ki Main Tujh Mein Utarta Hoon.


कभी देखेंगे ऐ जाम तुझे होठों से लगाकर,
तू मुझमें उतरता है कि मैं तुझमें उतरता हूँ।



Ik Sirf Hameen May Ko Aankhon Se Pilaate Hain
Kehne Ko To Duniya Mein Maikhane Hazaaron Hain!

-Shaharayaar

इक सिर्फ़ हमीं मय को आँखों से पिलाते हैं
कहने को तो दुनिया में मयख़ाने हज़ारों हैं!

-शहरयार


Sharaab Ke Bhee Apane Hee Rang Hain Saakee
Koee Aabaad Hokar Peeta Hai,
To Koee Barbaad Hokar Peeta Hai.


शराब के भी अपने ही रंग हैं साकी
कोई आबाद होकर पीता है,
तो कोई बर्बाद होकर पीता है।


Pada Hai Aks Jo Rukhsar-E-Shola-E-May Ka
To Aaeene Teri Yaadon Ke Jagamagae Hain
~Khursheed Ahmad Zaamee

पड़ा है अक्स जो रूख़्सार-ए-शोला-ए-मय का
तो आईने तेरी यादों के जगमगाए हैं

~ख़ुर्शीद अहमद ज़ामी


Ab To Utani Bhi Baaki Nahin May-Khaane Mein,
Jitni Ham Chhod Diya Karte The Paimaane Mein.

अब तो उतनी भी बाकी नहीं मय-ख़ाने में,
जितनी हम छोड़ दिया करते थे पैमाने में।


Qayamat Ke Aane Mein Rindo Ko Shak Tha
Jo Dekha To Vaij Chale Aa Rahe Hai
Baharon Mein Bhee May Se Parahej Hai Tauba
‘Khumaar Aap Kafir Hue Ja Rahe Hai..

Khumaar Bankavee


कयामतके आने में रिंदो को शक था
जो देखा तो वाइज चले आ रहे है
बहारों में भी मय से परहेज है तौबा
‘ख़ुमार’आप काफ़िर हुए जा रहे है..

ख़ुमार बंकवी


Yoon Hee Badnaam Kar Diya Hai Duniya Walon Ne Mayakhaanon Ko,
Jo Nasha Shabaab Mein Hota Hai Vo Sharaab Mein Kahaan.


यूँ ही बदनाम कर दिया है दुनिया वालों ने मयखानों को,
जो नशा शबाब में होता है वो शराब में कहाँ।


Vo Sahan-E-Baag Mein Aaye Hain May-Kashee Ke Lie
Khuda Kare Ke Har Ik Phool Jaam Ho Jae


वो सहन-ए-बाग़ में आए हैं मय-कशी के लिए
खुदा करे के हर इक फूल जाम हो जाए


Kuchh Bhi Bacha Na Kehne Ko Har Baat Ho Gayi,
Aao Kahin Sharab Peeyen Raat Ho Gayi.


कुछ भी बचा न कहने को हर बात हो गई,
आओ कहीं शराब पिएँ रात हो गई।


उनकी आंखें यह कहती रहती हैं
लोग नाहक शराब पीते हैं.


Unaki Ankhe Yah Lahati Rahati Hai,
Log Nahak Sharab Peete Hai.


साकी तेरा दीदार...
होने को आई शाम,
इन गहराए बादलो में,
तन को लगी शीतल बहार,
तलब हुई मयखानों की।
सोचा मंगा लूँ मदिरा,
करूँ यहीं बैठकर पान,
फिर सोचा चलूँ मयखाने,
करने साकी तेरा दीदार।
किया साकी दीदार तेरा,
चढ़ गई मुझको हाला,
चढ़ी हाला मुझको ऐसी,
नही जग ने सम्भाला।
हुई भोर चढ़ा सूरज,
दिन कब ढल गया,
फिर हुआ वही साकी,
जो पिछली शाम हुआ।
चला मै उसी राह,
जिस राह पर मयखाना था,
पर आज तू नहीं,
यहाँ तो मद्द का प्याला था।
हो आई तलब आज फिर से साकी तेरी,
इस जग से रुसवा हो जाऊँ,
या फिर तु हो जा मेरी।
आज फिर तुमने मुझे बताया कि मै कौन हूँ,
वरना मै तो केवल तुम्हारे भीतर ही समाया था।
हम वो नही साकी,
जो बेकद्र-ऐ-मोहब्बत हो,
हम वो है साकी,
जो शजर-ऐ-मोहब्बत हो।
साकी तेरा दीदार..
.
होने को आई शाम,
इन गहराए बादलो में,
तन को लगी शीतल बहार,
तलब हुई मयखानों की।
सोचा मंगा लूँ मदिरा,
करूँ यहीं बैठकर पान,
फिर सोचा चलूँ मयखाने,
करने साकी तेरा दीदार।
किया साकी दीदार तेरा,
चढ़ गई मुझको हाला,
चढ़ी हाला मुझको ऐसी,
नही जग ने सम्भाला।
हुई भोर चढ़ा सूरज,
दिन कब ढल गया,
फिर हुआ वही साकी,
जो पिछली शाम हुआ।
चला मै उसी राह,
जिस राह पर मयखाना था,
पर आज तू नहीं,
यहाँ तो मद्द का प्याला था।
हो आई तलब आज फिर से साकी तेरी,
इस जग से रुसवा हो जाऊँ,
या फिर तु हो जा मेरी।
आज फिर तुमने मुझे बताया कि मै कौन हूँ,
वरना मै तो केवल तुम्हारे भीतर ही समाया था।
हम वो नही साकी,
जो बेकद्र-ऐ-मोहब्बत हो,
हम वो है साकी,
जो शजर-ऐ-मोहब्बत हो।


Na Zakhm Bhare,
Na Sharab Sahara Hui,
Na Wo Wapas Lauti Na Mohabbat Dobara Hui.


न जख्म भरे,
न शराब सहारा हुई
न वो वापस लौटी न मोहब्बत दोबारा हुई।


दारु चढ के उतर जाती है
पैसा चढ जाये तो उतरता नही
आप अपने नशे में जीते है
हम जरा सी शराब पीते है..

गुलज़ार


Daru Chadh Ke Utar Jaati Hai,
Paisa Chadh Jaye To Utarta Nahi.
Aap Apne Nashe Mein Jeete Hai,
Ham Jara Si Sharab Peete Hai.


Ek Sharab Ki Botal Daboch Rakhi Hai,
Tujhe Bhulane Ki Tarkeeb Soch Rakhi Hai.


एक शराब की बोतल दबोच रखी है,
तुझे भुलाने की तरकीब सोच रखी है।


Parada To Hosh Vaalon Se Kiya Jaata Hai Huzoor,
Tum Benaqaab Chale Aao Ham To Nashe Mein Hain.


परदा तो होश वालों से किया जाता है हुज़ूर,
तुम बेनक़ाब चले आओ हम तो नशे में हैं।


Tum Kya Jano Sharab Kaise Pilayi Jati Hai,
Kholne Se Pehle Botal Hilayi Jati Hai,


Phir Aawaz Lagai Jati Hai Aa Jao Tute Dil Walo,

Yehan Darde-Dil Ki Dawa Pilayi Jati Hai.


तुम क्या जानो शराब कैसे पिलायी जाती है,
खोलने से पहले बोतल हिलाई जाती है,


फिर अबाज़ लगाई जाती है आ जाओ टूटे दिल वालो,
यहाँ दर्दे-दिल की दबा पिलाई जाती है।


जाम पे जाम पीने से क्या फायदा दोस्तों,
रात को पी हुयी शराब सुबह उतर जाएगी,


अरे पीना है तो दो बूंद बेवफा के पी के देख
सारी उमर नशे में गुज़र जाएगी ..


Jaam Pe Jaam Peene Se Kya Fayda Dosto,
Raat Ko Pee Huyi Sharab Subah Utar Jaayegi,


Are Peena Hai To Do Bund Bewafa Ke Pee Ke Dekh,

Sari Umar Nashe Me Guzar Jayegi..


थोड़ी सी पी शराब थोड़ी उछाल दी,
कुछ इस तरह से हमने जवानी निकाल दी,

Thodi Si Pee Sharab Thodi Uchhal Di,
Kuchh Is Tarah Se Hamane Jawaani Nikal Di..


May-Khaana Salamat Hai To Ham Surkhee-May Se,
Tazeen-E-Dar-O-Baam-E-Haram Karate Rahenge !


मय-ख़ाना सलामत है तो हम सुर्ख़ी-मय से,
तज़ईन-ए-दर-ओ-बाम-ए-हरम करते रहेंगे !


Kahte Hai Peene Wale Mar Jaate Hai Jawani Me,
Hamne To Bujurgon Ko Jabaan Hote Dekha Hai Maikhane Me.


कहते हैं पीने वाले मर जाते हैं जवानी में,
हमने तो बुजुर्गों को जवान होते देखा है मैखाने में।


Shokhiyon Mein Ghola Jaye Phoolon Ka Sharab
Us Mein Phir Milayi Jaye Thodi Si 
Sharab
Hoga Yoon Nasha Jo Taiyyaar Vo Pyaar 
Hai
-Neeraj

शोखियों में घोला जाये फूलों का शबाब
उस में फिर मिलाई जाये थोड़ी सी शराब
होगा यूँ नशा जो तैय्यार वो प्यार हैं

-नीरज

Bahut Ameer Hoti Hai Ye Sharab Ki Botale,
Paisa Chahe Jo Bhi Lag Jaye Sare Gam Khareed Leti Hain.


बहुत अमीर होती है ये शराब की बोतलें,
पैसा चाहे जो भी लग जाए सारे ग़म ख़रीद लेतीं हैं।


Toote Teri Nigah Se Agar Dil Habaab Ka
Pani Bhi Phir Pien To Maza De Sharab Ka


टूटे तेरी निगाह से अगर दिल हबाब का
पानी भी फिर पिएं तो मज़ा दे शराब का


मुझ तक कब उनकी बज़्म में आता था दौर-ए-जाम
साक़ी ने कुछ मिला न दिया हो शराब में.


Mujh Tak Kab Unki Bazm Mein Aata Tha Daur-E-Jaam,
Saki Ne Kuchh Mila Naa Diya Ho Sharab Me.


Nigah-E-Saqi Se Paiham Chhalak Rahi Hai Sharab,
Pio Kee Peene-Pilane Ki Raat Aayi Hai !


निगाह-ए-साक़ी से पैहम छलक रही है शराब,
पिओ की पीने-पिलाने की रात आई है !


Jigar Ki Aag Bujhe Jisse Jald Wo Shay La,
Laga Ke Barf Me Saqi,
Surahi-E-May La.


जिगर की आग बुझे जिससे जल्द वो शय ला,
लगा के बर्फ़ में साक़ी,
सुराही-ए-मय ला।


Ham To Samajhe The Ke Barasaat Mein Barsegi Sharab
Aayi Barsaat To Barsaat Ne Dil Tod Diya !


हम तो समझे थे के बरसात में बरसेगी शराब
आई बरसात तो बरसात ने दिल तोड़ दिया !


Maikade Band Kare Lakh Zamane Wale,
Shahar Me Kam Nahi Aankho Se Pilane Wale.


मैकदे बंद करें लाख जमाने वाले,
शहर में कम नहीं आँखों से पिलाने वाले।


पी रहा हूँ दोस्तों...
मैं खुदा का नाम लेकर पी रहा हूँ दोस्तों,
ज़हर भी इसमें अगर होगा दवा हो जाएगा,

सब उसी के हैं,
हवा,
खुशबू,
ज़मीनो-आसमाँ,
मैं जहाँ भी जाऊँगा उसको पता हो जाएगा।

मय छलक जाए तो कमजर्फ हैं पीने वाले,
जाम खाली हो तो साकी तेरी रूसवाई है।

पी रहा हूँ दोस्तों..
.
मैं खुदा का नाम लेकर पी रहा हूँ दोस्तों,
ज़हर भी इसमें अगर होगा दवा हो जाएगा,

सब उसी के हैं,
हवा,
खुशबू,
ज़मीनो-आसमाँ,
मैं जहाँ भी जाऊँगा उसको पता हो जाएगा।

मय छलक जाए तो कमजर्फ हैं पीने वाले,
जाम खाली हो तो साकी तेरी रूसवाई है।


Piyoon Sharab Agar Khum Bhi Dekh Loon Do Chaar
Ye Sheesha-O-Qadah-O-Kooza-O-Suboo Kya Hai

~Ghalib

पियूँ शराब अगर ख़ुम भी देख लूँ दो चार
ये शीशा-ओ-क़दह-ओ-कूज़ा-ओ-सुबू क्या है

~ग़ालिब


‘Haalee’ Nashaat-E-Nagama-O-May Dhoondhate Ho Ab
Aaye Ho Waqt-E-Subah..
Rahe Raat Bhar Kahaan


‘हाली’ नशात-ए-नग़मा-ओ-मय ढूंढते हो अब
आये हो वक़्त-ए-सुबह..
रहे रात भर कहाँ


Gam-E-Ishq Mein Maza Tha Jo Use Samajh Ke Khaate,
Ye Vo Zehar Hai Ki Aakhir May-E-Khush-Gawar Hota !

– Daag Dehlvi


ग़म-ए-इश्क़ में मज़ा था जो उसे समझ के खाते,
ये वो ज़हर है कि आख़िर मय-ए-ख़ुश-गवार होता !

– दाग़ देहलवी


Tumhen Jo Sochen To Hota Hai Kaif-Sa Taaree,
Tumhaara Zikr Bhee Jaame-Sharaab Jaisa Hai.!


तुम्हें जो सोचें तो होता है कैफ़-सा तारी,
तुम्हारा ज़िक्र भी जामे-शराब जैसा है.!


Bas Ek Itanee Vajah Hai Mere Na Peene Kee
Sharaab Hai Vahee Saaqee Magar Gilaas Nahin


बस एक इतनी वजह है मेरे न पीने की
शराब है वही साक़ी मगर गिलास नहीं