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ज़मीर ज़िन्दा रख
कबीर ज़िन्दा रख

सुल्तान भी बन जाए तो
दिल में फ़क़ीर ज़िन्दा रख

हौसले के तरकश मे
कोशिश का वो तीर ज़िन्दा रख

हार जा चाहे ज़िन्दगी मे सब कुछ
मगर फिर से जीतने की वो उम्मीद ज़िन्दा रख

मिटता हो ज़रूरी तो आज मिट जा ऐ इंसान
मगर मिटने के बाद भी इंसानियत ज़िन्दा रख


Zameer Zinda Rakh
Kabeer Zinda Rakh

Sultan Bhi Ban Jaye to
Dil Mein Faqeer Zinda Rakh

Hausale Ke Tarakash Me
Koshish Ka Vo Teer Zinda Rakh

Haar Ja Chaahe Zindagee Me Sab Kuchh
Magar Phir Se Jeetne Ki Vo Ummeed Zinda Rakh

Mitata Ho Zaroori to Aaj Mit Ja Ai Insaan
Magar Mitane Ke Baad Bhi Insaniyat Zinda Rakh

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