Zaroori Nahi Ki Kuch Todne Ke Liye | ज़रूरी नहीं कि कुछ तोड़ने के लिए


Zaroori Nahi Ki Kuch Todne Ke Liye | ज़रूरी नहीं कि कुछ तोड़ने के लिए
ज़रूरी नहीं कि कुछ तोड़ने के लिए 
पत्थर ही उठाते हैं लोग,
बस ज़रा सा लहजा बदल के बोलने से भी 
दिल टूट जाते हैं.

Zaroori Nahi Ki Kuch Todne Ke Liye 
Patthar Hi Uthate Hain Log, 
Bas Zara Sa Lehja Badal Ke Bolne Se Bhi 
Dil Toot Jaate Hain.